एईएस से निपटने को जिले के  स्वास्थ्य संस्थानों में खुलेगा नियंत्रण कक्ष 

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– सिविल सर्जन के पत्र जारी कर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को दिए निर्देश 
– 24×7 नियंत्रण कक्ष होगा, मरीजों को सुविधाजनक तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी स्वास्थ्य सुविधा 

लखीसराय, 01 अप्रैल।
एईएस/जेई (मस्तिष्क ज्वर/चमकी बुखार) से निपटने एवं मरीजों को बेहतर से बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर स्थानीय स्वास्थ्य विभाग आवश्यक तैयारी में जुट गया है । इसे सार्थक रूप देने के लिए जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एक-एक नियंत्रण कक्ष खोला जाएगा। जिसको लेकर सिविल सर्जन डाॅ देवेन्द्र चौधरी ने पत्र जारी कर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए हैं। जिस पत्र प्राप्ति के 24 घंटे के अंदर अपने-अपने स्वास्थ्य संस्थानों में 24×7 नियंत्रण कक्ष शुरू कराना सुनिश्चित कराने को कहा। ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित मरीजों को किसी प्रकार की कोई असुविधा नहीं हो और सुविधाजनक तरीके से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। 

– एईएस/जेई से निपटने के लिए की जा रही है व्यापक तैयारी : 
सिविल सर्जन डाॅ चौधरी ने बताया, जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में नियंत्रण कक्ष की स्थापना कराने का निर्देश प्राप्त हुआ है। जिसे सुनिश्चित करने को लेकर जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा एईएस/जेई के किसी भी स्थिति से निपटने के लिए व्यापक तैयारी की जा रही है। ताकि मरीजों को किसी प्रकार की अनावश्यक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़े और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। वहीं, उन्होंने जिले के तमाम पदाधिकारियों, कर्मियों से एकजुट होकर एईएस/जेई के खिलाफ कार्य करने और लोगों से चिकित्सा परामर्श का पालन करने की अपील की है। 

– कोविड नियंत्रण कक्ष के साथ ही एईएस कक्ष की होगी स्थापना : 
जिला भीबीडी सलाहकार नरेंद्र कुमार ने बताया, जिले के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में कोविड नियंत्रण कक्ष के साथ  ही एईएस/जेई नियंत्रण कक्ष की भी स्थापना की जाएगी। कोविड मरीजों के साथ ही एईएस मरीजों को नियंत्रण कक्ष में तैनात मेडिकल टीम द्वारा चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जाएगी। साथ ही नियंत्रण कक्ष के मुख्य द्वार पर दूरभाष संख्या भी लिखा जाएगा। ताकि जरूरत पड़ने पर संबंधित मरीज टेलीफोन से भी आवश्यक चिकित्सा परामर्श प्राप्त कर सके और चिकित्सा परामर्श के अनुसार अगला स्टेप ले सके। वहीं, उन्होंने बताया, इसके अलावा जिले में जन जागरूकता अभियान भी चलाकर एईएस से बचाव के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा।  

– ये है चमकी बुखार के प्रारंभिक लक्षण : 
– लगातार तेज बुखार रहना। 
– बदन में लगातार ऐंठन होना। 
– दांत पर दांत दबाए रहना। 
– सुस्ती चढ़ना। 
– कमजोरी की वजह से बेहोशी आना। 
– चिउटी काटने पर भी शरीर में कोई गतिविधि या हरकत न होना आदि। 

– चमकी बुखार से बचाव के लिए ये सावधानियाँ हैं जरूरी : 
– बच्चे को बेवजह धूप में घर से न निकलने दें। 
–  गन्दगी से बचें , कच्चे आम, लीची व कीटनाशकों से युक्त फलों का सेवन न करें। 
– ओआरएस का घोल, नीम्बू पानी, चीनी लगातार पिलायें।
– रात में भरपेट खाना जरूर खिलाएं।
– बुखार होने पर शरीर को पानी से पोछें।
–  पारासिटामोल की गोली या सिरप दें।

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