सरकारी अस्पताल में इलाज कराकर एमडीआर टीबी को भी दे दी मात

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-कटोरिया प्रखंड के जमुआ की रहने वाली सुधा देवी ने टीबी से जीती लड़ाई 
– निजी अस्पतालों में दिखा-दिखाकर आ गई थी एमडीआर टीबी की चपेट में

बांका, 08 सितंबर-

सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज को लेकर व्यवस्था कितनी सुदृढ़ है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि लोग निजी अस्पतालों में इलाज कराकर परेशान हो जा रहे हैं, लेकिन आखिर में ठीक सरकारी अस्पताल की दवा से ही हो रहे हैं। कई निजी अस्पतालों का चक्कर लगाने के बाद तो लोग एमडीआर टीबी की भी चपेट में आ जा रहे हैं। ऐसा ही एक उदाहरण है कटोरिया प्रखंड के जमुआ की रहने वाली सुधा देवी का । इनको जब टीबी के लक्षण दिखाई दिए तो पहले यह इलाज करवाने के लिए देवघर गईं, लेकिन जब वहां से बात नहीं बनी तो भागलपुर भी गईं। इस दौरान यह टीबी से एमडीआर टीबी की चपेट में आ गईं। आखिरकार ठीक हुईं कटोरिया रेफरल अस्पताल के इलाज से।
सुधा देवी कहती हैं कि जब मुझे टीबी के लक्षण के बारे में पता चला तो मैं यह सोचकर निजी अस्पताल चली गई कि वहां पर मेरा इलाज बेहतर होगा। पहले देवघर में इलाज करवाया, लेकिन वहां पर ठीक नहीं हो पाई। इसके बाद भागलपुर में भी इलाज करवाया। यहां तो ठीक नहीं हो पाई, लेकिन यहां के निजी अस्पताल के कर्मी ने मुझे यह समझाया कि आप अपने क्षेत्र के नजदीकी  सरकारी अस्पताल चले जाइए। वहां पर आप जल्द ठीक हो जाएंगी। साथ में इलाज भी मुफ्त होगा और भागलपुर आने के चक्कर से भी बच जाएंगी। 
जांच और इलाज में नहीं लगा कोई पैसा- सुधा देवी कहती हैं कि इस दौरान मैं एमडीआर टीबी की चपेट में आ गई थी। आखिरकार मैं कटोरिया स्थित रेफरल अस्पताल इलाज के लिए गई। वहां पर एसटीएस सुनील जी मुलाकात हुई। पहले उन्होंने मुझे समझाया कि चिंता की कोई बात नहीं है। एमडीआर टीबी से भी आपको छुटकारा मिल जाएगा। इसके बाद मेरी जांच हुई और उसके बाद इलाज। नियमित तौर पर दवा का सेवन करने के बाद मैं टीबी से ठीक हो गई। अब मुझे कोई परेशानी नहीं है। दो साल से मैं परेशान थी। अब बिल्कुल ठीक महसूस कर रही हूं। इलाज के दौरान मेरा एक भी पैसा नहीं लगा। साथ ही जब तक इलाज चला, मुझे पौष्टिक आहार के लिए पांच सौ रुपये प्रति महीना राशि भी मिली।
जब तक ठीक नहीं हो जाएं, दवा नहीं छोड़ें- जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. उमेश नंदन प्रसाद सिन्हा कहते हैं कि टीबी के लक्षण पता चलने पर लोगों को तत्काल सरकारी अस्पताल का रुख करना चाहिए। यहां पर जांच से लेकर दवा तक की मुफ्त व्यवस्था है। साथ में पौष्टिक भोजन के लिए राशि भी मिलती है। जहां तक एमडीआर टीबी की बात है तो यह दवा का नियमित तौर पर सेवन नहीं करने से होता है। ऐसा नहीं करें। जब आपकी टीबी की दवा शुरू हो जाती है तो उसे बीच में नहीं छोड़ें। जब तक ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक दवा खाते रहें। बीच में दवा छोड़ने से एमडीआर टीबी की चपेट में आने का खतरा हो जाता है। एमडीआर टीबी हो जाने पर स्वस्थ होने में भी ज्यादा वक्त लगता है।

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