आर भारत चैनल मुख्यालय में “Down Memory Lane, Memoirs of a Civil Servant” पुस्तक का विमोचन

– एस.एन.सहाय जैसे अधिकारी की आज आवश्यकता है जो आने वाले पीढ़ियों को यह बताएं कि अपने कर्तव्यों को कैसे निभाया जाए – अर्नब गोस्वामी, एडिटर इन चीफ, आर भारत
नई दिल्ली-
आर भारत चैनल मुख्यालय “Down Memory Lane, Memoirs of a Civil Servant” पुस्तक का विमोचन में किया गया। यह पुस्तक आईएसएस एस. एन. सहाय की याद में उनके द्वारा किए गए कार्यों पर आधारित है। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथिगण, परिवारजन तथा प्रशासनिक जगत के सम्मानित सदस्य उपस्थित रहे।
आर भारत चैनल के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी ने स्व. आईएसएस एस.एन.सहाय पर आधारित पुस्तक का विमोचन चैनल सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट के बीच किया। इस मौके पर अर्नब गोस्वामी ने कहा कि आज ऐसे अधिकारी की आवश्यकता है जो आने वाले पीढ़ियों को यह बताएं कि अपने कर्तव्यों को कैसे निभाने की जरूरत है। अर्नब गोस्वामी ने कहा कि जमीन स्तर पर जुड़कर लोगों की सेवा करना एस एस सहाय से सीखी जा सकती है।
इस मौके पर एस एस सहाय की पुत्री हेना प्रसून ने कहा कि पिता जी के बताए मार्गों पर हम आज भी लगातार कार्य कर रहे हैं। कोई ऐसा दिन नहीं है जब हम उन्हें याद नहीं करते। यहां तक कि सुबह उन्हें ध्यान करने के बाद की अपने कार्यों को आगे बढ़ाते हैं।
एस एन सहाय के पुत्र मनीष कुमार ने उनके द्वारा कई अद्वीतीय कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके दरवाजे पर कोई आता तो उसका कार्य अवश्य हो जाता था। उनके कार्यों से प्रभावित होकर बड़े अधिकारी उन्हें अपने विभाग का हीरा की संज्ञा दिए।
इस मौके पर एस एन सहाय के भांजे अमन सिन्हा के कहा कि अधिकारी के रूप में जितने अच्छे उन्होंने कार्य किए वैसे ही उनका व्यक्तित्व घर पर भी था वे सरल स्वभाव के थे जो हमें प्रभावित करता है।
एस एस सहाय के दामाद आईआरएस अधिकारी आनंद मोहन ने कहा कि विशाल व्यक्तित्व के अधिकारी रहे हैं। आज भी जब हम कोई कार्य करते हैं तो उनके बताए मार्ग पर ही चलते हैं।
एस एस सहाय की बहन पुष्पा सिन्हा ने याद करते हुए कहा कि वे सरल स्वभाव के थे। उनके आने के बाद घर का माहौल खुशनुमा हो जाता था। बहुत ही विनोदी स्वभाव के थे भईया। इस मौके पर आकाश सिन्हा, मधुर आनंद और शुभम आनंद ने भी अपने विचार रखें।
गौरतलब है कि पुस्तक श्री सहाय के साधारण परिवेश से लेकर एक ईमानदार और प्रभावशाली प्रशासनिक जीवन तक की प्रेरणादायक यात्रा को दर्शाती है। परिवार द्वारा प्रेमपूर्वक संकलित और संपादित यह कृति केवल एक संस्मरण नहीं, बल्कि वर्तमान और भावी प्रशासकों के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक है। इसमें प्रशासनिक कार्यप्रणाली के साथ साथ भावनात्मक समझ, व्यक्तित्व विकास और मानवीय दृष्टिकोण के महत्व को भी सहज रूप से प्रस्तुत किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान भावपूर्ण श्रद्धांजलि और स्मृतियों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व और योगदान को याद किया गया। उपस्थित जनों ने उन्हें एक कुशल प्रशासक के साथ साथ एक संवेदनशील और सिद्धांतनिष्ठ व्यक्ति के रूप में स्मरण किया। यह पुस्तक एक कालातीत धरोहर के रूप में उभरती है, जो सेवा, गरिमा और उद्देश्यपूर्ण नेतृत्व की प्रेरणा देती है।
