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आज वैल्यू वेस्ड एजुकेशन की जरूरत है- डॉ. सत्यपाल सिंह, सांसद

-आज एजुकेशन को ग्रामीण भारत से जोड़ने की जरूरत है- राजमणि पटेल, सासंद
-एकेडमिशियन को जिम्मेदारी लेनी होगी- अनुपम हाजरा, नेशनल सेक्रेटरी, भाजपा
-आईसीसीआई का चौथा नेशनल एजुकेशन एक्सलेंस कॉन्कलेव का भव्य आयोजन में एजुकेशनिस्ट ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया।

नईदिल्ली-

आज एजुकेशन पर बजट बढ़ाने की जरूरत है। लेकिन इससे ज्यादा एजुकेशन में मूल्यों को भी जोड़ने की आवश्यकता है। यह बात इंटीग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के कॉन्कलेव को संबोधित करते हुए सांसद डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा।
इंटीग्रेटड चैबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, आईसीसीआई का चौथा नेशनल एजुकेशन एक्सलेंस कॉन्कलेव का आयोजन इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के मल्टीपरपस हॉल में किया गया। इस एजुकेशन समिट में देश भर के शिक्षा के तमाम दिग्गजों ने संबोधित किया। इंटिग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईसीसीआई) द्वारा आयोजन इस नेशनल समिट में अति मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा सांसद डॉ सत्यपाल सिंह ने संबोधित किया।
इस मौके पर डॉ सत्यपाल सिंह ने कहा कि आज देश में एजुकेशन बजट बढाने की जरूरत है। लेकिन इसके साथ स्ट्रक्चर बदलने की जरूरत है। केवल बजट बढ़ाने से कार्य नहीं चलेगा। आज देश में वैल्यू वेस्ड एजुकेशन की जरूरत है। जिसके लिए एकेडमिशियन को कार्य करना होगा।
डॉ सत्यपाल सिंह ने देश के पहले एजुकेशन मिनिस्टर मौलाना अब्दुल कलाम को कोट करते हुए कहा कि एजुकेशन दस-बीस वर्ष का प्लान नहीं है। जीवन भर एजुकेशन खाका खिंचने की जरूरत है।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में सांसद राजमणि पटेल ने कॉन्कलेव को संबोधित करते हुए कहा कि आज एजुकेशन को ग्रामीण भारत से जोड़ने की जरूरत है। एजुकेशन में मूलभूत कमियां हैं जिसकी सुधारकरने की जरूरत है। जिसके लिए सरकार को भी कदम उठाने की जरूरत है।
आईसीसीआई के एजुकेशन कॉन्कलेव को संबोधित करते हुए भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी डॉ अनुपम हाजरा ने कहा कि केवल इंफ्रास्ट्रक्चर से एजुकेशन को नहीं सुधारा जा सकता। इसके लिए आज सबसे ज्यादा एकेडमिशियनों को जिम्मेदारी लेनी होगी। तभी एजुकेशन में तेजी से सुधार होगा। केंद्र सरकार ने नए एजुकेशन पॉलिसी में कई सुधार किए हैं जिसे लागू किया जा रहा है।
आईसीसीआई के इस कार्यक्रम में चार सत्र में एकेडमिशियनों ने संबोधित किया। पहला उद्घाटन में मुख्य वक्ता के रूप में नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रिडेशन के चेयरमैन प्रो. केके अग्रवाल ने एजुकेशन संस्थाओं के मूलभूत सुधार पर खास जोर दिया। खासतौर पर एजुकेशन के इंटिग्रेशन की बात कही। उद्घाटन सत्र में
एआईसीटी के चीफ कॉर्डिनेटर डॉ बुद्धा चंद्रशेखर ने कहा कि आज नई एजुकेशन पॉलिसी में कई बदलाव हुए हैं। जिसमें प्रैक्टिकल पर ज्यादा जोर है जिससे छात्र अब स्वरोजगार की ओर बढ़ने लगे हैं। आज स्किल पर कार्य करने की जरूरत है जो आपको इस नई एजुकेशन पॉलिसी में साफ दिखेगा।
एऩआईटी कुरुछेत्र के डायरेक्टर प्रो बी पी रमन्ना रेड्डी,एएएफटी के चांसलर डॉ संदीप मारवाह, इलेक्ट्रानिक सेक्टर स्कील काउन्सिल आफ इंडिया के सीओओ डॉ अभिलाषा गौड़ ने संबोधित किया।
पहले सत्र के दूसरे भाग में आईईसी यूनिवर्सिटी के प्रो चांसलर डॉ सुनिता सिंह, राउरकेला इंस्टीट्यूट ओफ मैनेजमेंट स्टडीज के सेक्रेटरी प्रो आर्या पटनायक, आईबिजनेस इंस्टीट्यूट के एमडी सुजीत राय, एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो एनके तपक, बनस्थली विद्यापीठ के डायरेक्टर डॉ अंशुमान शास्त्री, ग्लोबल इंस्टीट्यूट ओफ फार्मास्टयूटिकल एडुकेशन एंड रिसर्च के दीपक तोतिया एवं आर्याकुल ग्रुप ऑफ कॉलेज के एमडी सशक्त सिंह एवं एलएनसीटी यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ एनके टपक ने पैनेल डिस्कसन में भाग लिया एवं आडियशन के प्रश्नों का जवाब भी दिया।
दूसरे सत्र को भी दो भागों में बांटा गया है जिसमें पहले सत्र का विषय है रिफोर्म्स इन करिकुलम एंड एड्रेसिंग शार्टेज आफ क्वालिटी फैक्लिटी एंड एकेडमी लीडर्स। इस सत्र में सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ हरियाणा के वीसी प्रो तंकेश्वर कुमार, महाराजा अग्रसेन हिमालियन ग्रेवाल यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो एनके सिन्हा, आर्याकुल ग्रुप ऑफ कॉलेज के एमडी सशक्त सिंह, स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड डेवलमेंट सुशांत यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर प्रो प्रिथा रवीसरी साजिन एवं कोल पोल के राजेंद्र सिंह ने पैनेल डिस्कसन में भाग लिया एवं दर्शकों के प्रश्नों का जवाब भी दिया।
आईसीसीआई के इस खास कॉन्कलेव में देश भर के एजुकेशन संस्थाओं को सम्मानित भी किया गया।
समापन सत्र को शोभित यूनिवर्सिटी के वीसी कुंवर विजेंद्र शेखर ने संबोधित किया। एजुकेशन एक्सलेंस कानक्लेव में आईसीसीआई के डायरेक्टर जेनरल कमलेंदु बाली ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
गौरतलब है कि आईसीसीआई देश के बड़े आर्थिक थिंक टैंक है जो सभी सेक्टरों के उद्यमियों को एक मंच देता है।

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