कालगणना अनुसार दो आश्विन मास एक शताब्दी में 19 – 19 वर्ष के अंतराल पर 5 बार होते हैं

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कालगणना अनुसार दो आश्विन मास एक शताब्दी में 19 – 19 वर्ष के अंतराल पर 5 बार होते हैं।
फिर 83 वर्ष बाद दो अश्विन मास होते हैं।
इस प्रकार सन् 1880 में दो आश्विन अधिक मास हुए थे। इसके 83 वर्ष बाद
सन् 1963 में दो आश्विन अधिक मास हुए।
फिर 19 वर्ष बाद सन् 1982 में,
फिर 19 वर्ष बाद सन् 2001 में,
फिर 19 वर्ष बाद सन् 2020 में दो आश्विन मास हुए।
अब 19 वर्ष बाद फिर सन् 2039 में दो आश्विन मास होंगे।
उसके 83 वर्ष बाद दो आश्विन मास होंगे।

हमेशा 32 महीने 16 दिन बाद अधिक मास पुनः आता है।
अधिक मास में चंद्रमास की दो अमावस्याओं के बीच मासिक सूर्य संक्रांति नहीं होती है।
मात्र 9 माह – माघ, फाल्गुन, चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद व आश्विन मास ही अधिक मास होते हैं।
कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष माह कभी भी अधिक मास नहीं होते हैं।

इस बार आश्विन अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो रहा है, जो 16 अक्टूबर तक रहेगा।
अधिक मास को पुरुषोत्तम मास, मलमास भी कहा जाता है। इन 30 दिनों में उज्जैन स्थित सप्तसागर यात्रा का महत्व अधिक है।
बृहन्नारदीय पुराण में इसका विस्तार से उल्लेख है। इस पुरुषोत्तम मास में श्रद्धा – भक्ति के साथ व्रत, उपवास, पूजा आदि शुभ कर्म करना चाहिए। यह 12 महीनों में सर्वश्रेष्ठ पुरुषोत्तम मास के नाम से विख्यात है।
ज्योतिषाचार्य जयकान्त शर्मा कौण्डिन्य

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