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चुनाव विशेष-’डैमेज’ के बाद ’बड़े डैमेज’ के लिए अविनाश-वेणुगोपाल-माकन पहुंचे बिहार


ये तिकड़ी वार्ड सदस्य जिताने की हैसियत में नहीं, पर बनाएंगे जीत की रणनीति?

-रितेश सिन्हा

कांग्रेस के टिकट बंटवारे का विवाद अभी थमा नहीं कि लेन-देन के एक बड़े खिलाड़ी अविनाश पांडे भी बिहार में कूद गए। उनके साथ माकन और वेणुगोपाल बिहार पहुंचे। पार्टी महासचिव और उत्तर प्रदेश के प्रभारी अविनाश पांडे पर यूपी में ही 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान उम्मीदवारों को जारी पार्टी फंड के बंदरबांट करने का संगीन आरोप है। बुलंदशहर के जिलाध्यक्ष ठाकुर राजेश भाटी ने 17 अप्रैल 2024 में लिखे पत्र में यूपी के खुर्जा सुरक्षित क्षेत्र में चुनाव लड़ रहे शिवराम बाल्मीकि से 35 लाख पैसे वसूली के लिए अविनाश पांडे और उनके रिकवरी गैंग में शामिल सचिवों तौकिर आलम, विदित चौधरी और प्रदीप नरवाल पर गंभीर आरोप लगाए थे। पत्र की प्रतिलिपि हमारे पास उपलब्ध है, जिस पर हमने पहले भी खबर प्रकाशित किया था। इस बात का खुलासा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की मौजूदगी में प्रेस वार्ता के दौरान किया गया था।

अविनाश पांडे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि वे विधानसभा चुनावों के लिए संगठनात्मक समन्वय और रणनीति निर्माण की जिम्मेदारी संभालेंगे। आपको बता दें कि पार्टी के महासचिव के तौर पर दशक पूरा कर चुके, नागपुर के धर्मपेट क्षेत्र के रहने वाले अविनाश पांडे अपने क्षेत्र में वार्ड सदस्य जिताने की हैसियत में नहीं हैं। इनके यहां दशकों से इनका वार्ड भाजपा का गढ़ बना हुआ है। इनकी ’इरोज इंडस्ट्रीज’ का कारोबार इनके प्रभार वाले प्रदेशों में फलने-फूलने लगता है। झारखंड प्रभार के दौरान प्रदेश के अस्पतालों में केवल इनके बेड और फर्नीचर सप्लाई होते थे। नागपुर में ये अपने हुंडई कार के शो रूम में और घर के बाहर सार्वजनिक स्थल पर दिखाई नहीं देते। इनका राजनीतिक और कारोबारी साझेदार रविंदर दरेकर ही एकमात्र इनके करीबी हैं। इनकी विधानसभा का नेतृत्व वर्तमान में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस हैं। अविनाश पांडे की स्थिति वोट दिलाने के नाम पर चूहा पकड़ने की भी नहीं रही। बिहार में अपने पुराने बॉस सुबोध कुमार की सरपस्ती में प्रदेश की रणनीति बनाएंगे। सुबोध ने ही महाराष्ट्र में इन्हें एनएसयूआई का अध्यक्ष बनाया था। दिल्ली के इंचार्ज रह चुके सुबोध ने ही माकन को एनएसयूआई में अवसर दिया था। कहने को ये तिकड़ी राष्ट्रीय नेताओं में बड़ी हैसियत रखती है, मगर सुबोध के समक्ष इनकी हैसियत उस्ताद और शागिर्द की है।

यूपी जैसे बड़े सूबे के प्रभारी के तौर पर पार्टी को केवल रायबरेली और अमेठी तक सीमित कर चुके हैं। कांग्रेसियों की बात पर गौर फरमाएं तो अविनाश पांडे, अजय माकन और केसी वेणुगोपाल बिहार में पैसे बांटने के नाम पर क्या खेल करेंगे, इसकी चर्चाएं अब जोर पकड़ रही है। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि केवल प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पर ’टिकट बेचो’ अभियान का ठीकरा फोड़कर स्क्रीनिंग कमिटी के चेयरमैन अजय माकन, संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को क्लीन चिट देना केवल आंखों में धूल झोंकना है। इन कार्यकर्ताओं का आरोप है कि केवल अल्लावरू को आगे कर खेल खेला गया है।

बिहार में कांग्रेस ए टीम बनने की बजाए राजद की डी टीम बन गई है। बी टीम बनी वीआईपी अपने नेता के नाम पर उपमुख्यमंत्री की मोहर लगवा चुकी है। वहीं वामदलों ने अपने दम-खम पर गठबंधन में अपनी हैसियत बनायी है। कांग्रेस सीटों के बंटवारे पर नंबर दो पर है। दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों की बात करने वाली कांग्रेस गठबंधन में इनका मुख्यमंत्री बनाने की बात के प्रस्ताव तक को नहीं रख पायी। कहने को कांग्रेस का केंद्रीय और प्रदेश अध्यक्ष दलित समुदाय से संबंध रखता है, लेकिन किस डील के तहत ये घोषणा करा नहीं सके। कांग्रेस के नेताओं में इस बात का बड़ा आक्रोश है कि एनडीए के खिलाफ माहौल बनाने वाले राहुल की पदयात्रा में आगे-पीछे कूदने वाले तेजस्वी मुख्यमंत्री के दावेदार हैं। वहीं वीआईपी जिनका अता-पता नहीं था, वो उपमुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार है। देश भर में जिस प्रकार अल्पसंख्यक मुस्लिम व दलितों का समर्थन राहुल को मिला, उनको प्रतिनिधित्व देने के नाम पर बाहरी उम्मीदवारों को टिकट पकड़ा दिए गए।

आपको बता दें कि पहली बार ऐसा हो रहा है कि फ्रंटल से जुड़े कई प्रदेश प्रमुखों जिनमें महिला, किसान, सेवा दल, ओबीसी, दलित विभाग के किसी अध्यक्ष को टिकट नहीं दिया गया। इनके प्रतिनिधित्व के नाम पर रातोंरात लोकजनशक्ति, भाजपा, जदयू से आए लोगों को टिकट पकड़ा दिया गया और कार्यकर्ताओं को घर बैठने या अपनी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलने पर मजबूर कर दिया। सदाकत आश्रम में हुए धरने से इसकी झलक दिखी। विदित हो कि टिकट बंटवारे के तुरंत बाद अशोक गहलोत ने स्थिति को भांपा और बिहार में एनएसयूआई के पुराने साथियों से वर्तमान माहौल की जानकारी ली और आलाकमान को रिपोर्ट दी। इसके बाद माकन, वेणुगोपाल और अविनाश पांडे की तिकड़ी बिहार पहुंची। ऐसा भी किसी प्रदेश में पहली बार हो रहा है। बिहार में ’वोट चोर’ के नारे के बाद ’टिकट चोर’ के कारोबार के बाद से ही राहुल ने प्रदेश से फिलहाल दूरी बनाई हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के बड़े नेता बिहार में चुनावी सभाएं कर चुके हैं। तेजस्वी भी जोर-शोर से प्रचार में जुटे हैं, मगर राहुल-प्रियंका की चुनावी सभा की अभी तक कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसी से पता लगता है कि कांग्रेस ने पहले ही मैदान छोड़ दिया है। डैमेज कंट्रोल पर कृष्णा अल्लावरू को यूथ कांग्रेस के प्रभारी पद से हटाया गया है, मगर अब भी बिहार के प्रभारी वे बने हुए हैं। टिकट बेचने के खेल में ये अकेले नहीं हैं, इनकी बाकी कारोबारी साथी भी डैमेज कंट्रोल के नाम पर बिहार में पहुंच गए हैं। बिहार में पहुंची ये बोगस टीम के माकन, अविनाश और वेणुगोपाल किस भाषा में कार्यकर्ताओं को समझाएंगे, ये चर्चा का विषय है। कार्यकर्ताओं के रोष को देखते हुए ये नेता होटल और सदाकत आश्रम से बाहर चुनावी सभाओं में कांग्रेस का पक्ष रखने जाएंगे, इस पर अब तक संशय की स्थिति बनी हुई है।

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