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“आज का प्रहरी” की सुर्खियों में—ब्रिस्बेन में विश्व हिंदी परिषद की अंतरराष्ट्रीय साहित्य चौपाल

विश्व हिन्दी परिषद की ऑस्ट्रेलिया अध्यक्ष मधु खन्ना के नेतृत्व में भव्य आयोजन, अंतरराष्ट्रीय सहभागिता ने बढ़ाया गौरव

ब्रिस्बेन (ऑस्ट्रेलिया)
हिंदी भाषा और साहित्य को वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए विश्व हिंदी परिषद के तत्वावधान में ब्रिस्बेन में प्रथम अंतरराष्ट्रीय साहित्य चौपाल का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की बढ़ती प्रतिष्ठा को एक नई ऊँचाई प्रदान की।
कार्यक्रम का सफल आयोजन परिषद की ऑस्ट्रेलिया अध्यक्ष मधु खन्ना के नेतृत्व में संपन्न हुआ, जिनके समन्वय और दूरदर्शिता ने विभिन्न देशों के हिंदी साहित्यकारों को एक मंच पर जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रयासों से यह आयोजन वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली सिद्ध हुआ।
कार्यक्रम के मार्गदर्शन में विश्व हिन्दी परिषद के राष्ट्रीय महासचिव डॉ विपिन कुमार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। साथ ही, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डी पी मिश्र एवं राष्ट्रीय संपर्क समन्वयक डॉ नंद किशोर शाह का सहयोग भी उल्लेखनीय रहा, जिन्होंने विभिन्न देशों के हिन्दी विद्वानों को जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
यह गरिमामय कार्यक्रम ब्रिस्बेन के प्रतिष्ठित एम्पोरियम होटल में आयोजित किया गया, जिसमें भारत सहित विश्व के अनेक देशों से हिंदी साहित्यकारों और विद्वानों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “अस्तित्व: संघर्ष में जीत” पुस्तक का विमोचन रहा, जिसे ब्रिस्बेन में भारत के कार्यवाहक कौंसुल जनरल सुशील कुमार गोयल द्वारा औपचारिक रूप से जारी किया गया। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया।
इस अंतरराष्ट्रीय साहित्य चौपाल में ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न प्रांतों के साथ-साथ न्यूज़ीलैंड, जर्मनी, इंग्लैंड, अमेरिका, जापान और भारत से हिंदी विद्वानों को आमंत्रित किया गया। अनेक प्रतिभागी आभासी माध्यम से सिडनी, पर्थ और मेलबर्न से जुड़े, जबकि ब्रिस्बेन एवं आसपास के क्षेत्रों से २२ कवि और साहित्यकार स्वयं उपस्थित हुए।
कार्यक्रम में अर्चना गोयल, हर्षिता सोम (क्वींसलैंड विश्वविद्यालय), पूजा भारद्वाज, डॉ. भावना कुँवर, डॉ. सपना कपूर, डॉ. शलभ कुमार, डॉ. किशोर मिश्रा, कादम्बरी आदेश, डॉ. रंजीत शर्मा, सौम्या प्रधान, डॉ. मृदुल कीर्ति, राशि सक्सेना, पंकज अग्रवाल, डॉ. संगीता बनाफर, दुर्वा तिवारी, डॉ. मेनका त्रिपाठी, डॉ. बृज राज पांडे, डॉ. वेद व्यथित सहित अनेक साहित्यकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आयोजन की अगुवाई स्वयं मधु खन्ना द्वारा की गई।
इस अवसर पर सभी प्रतिभागियों को विश्व हिंदी परिषद के चिन्ह सहित प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही, ब्रिस्बेन की ग्रे स्ट्रीट, साउथ बैंक पर ११ एवं १२ अप्रैल को इस आयोजन के इलेक्ट्रॉनिक पोस्टर सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए गए, जिसने स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम की गरिमा उस समय और बढ़ गई जब भारत के कौंसुलेट जनरल द्वारा उपस्थित हिंदी प्रेमियों और साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। यह आयोजन न केवल साहित्यिक संवाद का मंच बना, बल्कि वैश्विक स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार का सशक्त माध्यम भी सिद्ध हुआ।
उल्लेखनीय है कि ब्रिस्बेन में आयोजित यह प्रथम अंतरराष्ट्रीय साहित्य चौपाल हिंदी के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में सामने आई है। आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी प्रतिभागियों और समर्थकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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