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केंद्र और राज्य की योजनाओं का संगम हैं ‘ग्राम उत्थान शिविर’ – सुशासन की नई मिसाल

डॉ नयन प्रकाश गांधी  मैनेजमेंट विश्लेषक & पब्लिक पॉलिसी एक्सपर्ट

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“भजनलाल सरकार ने यह सिद्ध किया है कि सुशासन वातानुकूलित कमरों से नहीं, बल्कि गांव की चौपाल से संचालित होता है। डबल इंजन की सरकार का यह प्रयास राजस्थान के ग्रामीण परिवेश में खुशहाली की नई इबारत लिख रहा है”…..
अक्सर यह देखा जाता है कि नीतियां बनती हैं और फाइलों में सिमट कर रह जाती हैं, लेकिन वर्तमान भजनलाल सरकार ने प्रशासन का रुख गांवों की ओर मोड़कर यह साबित कर दिया है कि सत्ता का असली उद्देश्य ‘अंत्योदय’ यानी कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति का उत्थान है। सुशासन की असली कसौटी यह नहीं है कि सरकार ने कितनी योजनाएं बनाईं, बल्कि यह है कि उन योजनाओं का लाभ कितनी सुगमता से आमजन तक अंतिम जरूरतमंद को पहुँचा। 1512 गिरदावर सर्किलों में शिविरों का आयोजन और 13 प्रमुख विभागों का एक ही छत के नीचे आना, प्रशासनिक विकेंद्रीकरण का एक ऐसा मॉडल है, जो लाल फीताशाही पर करारा प्रहार करता है।एकल खिड़की: नौकरशाही के मकड़जाल से मुक्तिकेंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए राज्य मशीनरी जिस गति से काम कर रही है, वह ‘डबल इंजन’ के प्रभाव को रेखांकित करता है। पीएम सूर्य घर योजना हो, सॉयल हेल्थ कार्ड हो या किसान क्रेडिट कार्ड, इन सभी केंद्रीय योजनाओं का लाभ बिना किसी अवरोध के ग्रामीणों तक पहुँचाना राज्य सरकार की प्राथमिकता रही है।इन शिविरों में अब तक 13 लाख 91 हजार से अधिक लोगों की सहभागिता यह बताती है कि जनता में जागरूकता बढ़ी है और प्रशासन के प्रति विश्वास लौटा है। यह केवल भीड़ नहीं है, यह उन उम्मीदों का हुजूम है जो मानती हैं कि अब उनकी सुनवाई होगी। 13 विभागों का एक साथ उपस्थित होना ग्रामीण जनता को सरकारी दफ्तरों के लगातार चक्करों से मुक्ति दिलाता है, जो दशकों से ग्रामीण भारत की पीड़ा रही है।कृषि और पशुपालन: ग्रामीण अर्थतंत्र को संजीवनीराजस्थान की मरुधरा में कृषि और पशुपालन एक-दूसरे के पूरक हैं। इन शिविरों के माध्यम से सरकार ने इन दोनों स्तंभों को मजबूत करने का काम किया है। 6 लाख 37 हजार किसानों को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की जानकारी देना, किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। वहीं, 98 हजार से अधिक ‘सॉयल हेल्थ कार्ड’ का वितरण यह सुनिश्चित करता है कि खेती अब अनुमान पर नहीं, बल्कि विज्ञान पर आधारित हो।पशुपालन विभाग की सक्रियता विशेष रूप से सराहनीय है। 92 हजार पशुओं का बीमा पंजीकरण और 5.11 लाख पशुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना, ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा को सुनिश्चित करता है। क्लासिकल स्वाइन फीवर जैसे रोगों के प्रति टीकाकरण अभियान यह दर्शाता है कि सरकार विपदा आने से पहले ही समाधान के प्रति सजग है। यह दृष्टिकोण पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है।मातृशक्ति की भागीदारी: बदलता सामाजिक परिदृश्यकिसी भी समाज का विकास तब तक अधूरा है, जब तक उसमें मातृशक्ति की भागीदारी न हो। शिविरों में 4 लाख 12 हजार महिलाओं की उपस्थिति इस बात का संकेत है कि राजस्थान की नारी अब योजनाओं की केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि विकास की भागीदार बन रही है। स्वयं सहायता समूहों और डेयरी सहकारी समितियों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने की दिशा में भजनलाल सरकार के प्रयास रंग ला रहे हैं।वहीं, युवाओं के लिए 14,737 स्वरोजगार आवेदन और 2,443 नए कस्टम हायरिंग सेंटर्स की स्थापना, रोजगार के नए अवसर सृजित करेगी। कस्टम हायरिंग सेंटर्स न केवल युवाओं को आय का साधन देंगे, बल्कि छोटे किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र भी किराए पर उपलब्ध करवाएंगे, जिससे खेती की लागत कम होगी।
पारदर्शिता: सुशासन का मूल मंत्र
पूर्ववर्ती व्यवस्थाओं में अक्सर पारदर्शिता का अभाव और बिचौलियों का बोलबाला रहता था। लेकिन इन शिविरों में ‘ऑन-द-स्पॉट’  निस्तारण और डिजिटलीकरण पर जोर देकर सरकार ने भ्रष्टाचार की गुंजाइश को कम कर दिया evam गुड गवर्नेंस को बढ़ावा दिया है। 29,800 किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के आवेदन और सहकारी ऋणों की जानकारी सीधे किसानों तक पहुँचाकर, उन्हें साहूकारों के चंगुल से मुक्त कराने का मार्ग प्रशस्त किया गया है। वास्तव में ये ‘ग्राम उत्थान शिविर’ राजस्थान के विकास यात्रा में एक मील का पत्थर साबित होंगे । यह शुरुवात प्रदर्शित करती है कि जब नेतृत्व की नियत साफ हो और ‘डबल इंजन’ की शक्ति साथ हो, तो बदलाव संभव है। 5 से 9 फरवरी तक चलने वाले द्वितीय चरण के शिविरों से यह उम्मीद और प्रबल होती है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहेगा।यह केवल शिविर नहीं हैं, बल्कि यह ‘विकसित राजस्थान’ की नींव रखने का एक महायज्ञ है। प्रशासन का गांवों के द्वार तक पहुँचना, लोकतंत्र की सबसे सुंदर तस्वीर है। आने वाले समय में यदि इन शिविरों में आए आवेदनों का शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके और जनभागीदारी का यह उत्साह बना रहे, तो निश्चित रूप से यह पहल राजस्थान के गांवों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में क्रांतिकारी भूमिका निभाएगी। सुशासन का सूर्य अब गांवों के क्षितिज पर चमकने को तैयार है, आवश्यकता है तो बस निरंतरता और प्रतिबद्धता की।

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