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समीक्षा बैठक से कांग्रेसी नदारद, बंद कमरे से जारी किया तुगलकी फरमान

अल्लावरू, राजेश राम और शकील को बिहार के कांग्रेसियों ने नकारा

-रितेश सिन्हा

विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी में हड़कंप मचा हुआ है। 61 सीटों पर चुनाव लड़ने वाली पार्टी में कांग्रेसी केवल 22 सीटों पर चुनाव लड़ पाए। बड़े कारोबार के साथ दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को तरजीह मिली और दिल्ली के राजनीतिक रसूखों के बूते जो टिकट लेने में कामयाब रहे, उन्हें दोस्ताना मुकाबले में निबटा दिया गया। खुद को वैशाली का विधायक मान चुके इं‐ संजीव सिंह, गठबंधन की बन रही सरकार में काबीना मंत्री का ख्वाब पाले हुए जितेंद्र यादव का सपना टूट गया। इसकी बौखलाहट दिल्ली के समीक्षा बैठक में दिखी। दिल्ली की समीक्षा बैठक से बाहर बिठाए गए प्रभारी कृष्णा अल्वावरू, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और पूर्व सीएलपी डा‐ शकील अहमद खां ने अपनी चौधराहट दिखाने के लिए पटना के सदाकत आश्रम के हॉल में समीक्षा बैठक रखी। इस समीक्षा बैठक का प्रदेश कांग्रेस के छोटे-बड़े नेताओं के साथ लगभग 30 से अधिक जिलाध्यक्षों ने बहिष्कार किया।

तय समय के एक लंबे इंतजार के बाद भन्नाए प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सीएलपी ने राजेश राम के कमरे में मौजूद 8 जिलाध्यक्षों और अपने चंपुओं के साथ समीक्षा बैठक की खाना-पूर्ति कर ली। सदाकत आश्रम की तस्वीरें इसकी साक्षी हैं। समीक्षा तो छूट गई। आनन-फानन में अपने अस्तित्व को नकारे जाने से बौखलाए इन तीनों नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष के मौखिक आदेश पर प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के कर्मचारी नलिन कुमार के द्वारा जारी पत्र से 15 जिला अध्यक्षों को नोटिस जारी कर दिया। ये तीनों नेता इससे पहले भाजपा के स्लीपर सेल के नाम से चर्चित हुए कपिल देव यादव से कारण बताओ नोटिस जारी कराकर अपनी फजीहत करा चुके हैं। निष्कासन संबंधी मामले को लेकर दिल्ली पहुंचे असंतुष्ट नेताओं को एआईसीसी ने ऐसी किसी अनुशासन समिति के गठन को फर्जी करार दिया। यही वजह है कि अब प्रदेश कार्यालय के कर्मचारी नलिन के नाम से जिलाध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

असंतुष्ट समूह के फायरब्रांड नेता आदित्य पासवान ने पहले भी इन अनुशासन समिति को फर्जी करार दिया था। अब नलिन के नाम से जारी पत्र को दिखाते हुए इन तीनों नेताओं की तिकड़ी पर फर्जीवाड़ा करने का गंभीर आरोप लगाया। असंतुष्ट समूह के नेताओं का कहना है कि अब इन नेताओं में इतना साहस नहीं है कि बंद कमरे के बाहर सदाकत आश्रम में कोई बैठक कर सके। बिहार प्रदेश यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नागेंद्र कुमार विकल ने बताया कि राजेश राम कार्यकर्ताओं का विश्वास पूरी तरह खो चुके हैं। गंभीर आरोपों का सामना कर रहे इस तिकड़ी को सामूहिक रूप से पार्टी की करारी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। नाम न छापने की शर्त पर पूर्व केंद्रीय मंत्री व वरिष्ठ नेता ने बताया कि जिस सोच के साथ कांग्रेस आलाकमान ने दलित के नाम पर राजेश राम पर विश्वास किया था, उसमें ये पूरी तरह से विफल रहे हैं।

अगड़ी जातियों के साथ-साथ मुस्लिम, पिछड़े, अतिपिछड़े और दलितों की बड़ी जमात पासवान और मांझी समुदाय के लोगों को एनडीए में धकेलने का काम किया है। आपको बता दें कि राजेश राम ने सारण जिला में जिस बच्चू प्रसाद उर्फ वीरू को जिलाध्यक्ष बनाया था, वो नोनिया जाति से आते हैं, चुनाव से पहले पार्टी को जिले को झोले में समेटकर भाजपा में शामिल हो गए। जिस अजय सिंह को हटाया था, उनके हटने के बाद इन विधानसभा चुनावों में सारण की 10 सीटों में 4 सीटों पर राजपूत, 1 पर भूमिहार, 1 पर बनिया, 1 कुर्मी और 1 सुरक्षित सीट के अलावा 2 पर यादव समुदाय के नेताओं को जीत मिली। 4 जिलों में तो कांग्रेस की तरफ से उम्मीदवारी ही नहीं दी गई। आपको बता दें कि पिछड़े और अतिपिछड़े व वोट चोरी का मुद्दा बनाकर चुनाव में गई कांग्रेस को मुंहकी खानी पड़ी।

243 विधायकों में 95 अगड़ों ने कांग्रेस के एजेंडे का मजाक उड़ा दिया। इनमें 33 राजपूत, 22 भूमिहार हैं जो पिछले विधानसभा चुनाव के जातीय अनुपात से अधिक हैं। कांग्रेस ने अगड़ों को टिकट से वंचित किया और पिछड़े और दलितों ने इन्हें नकार दिया। दिल्ली में हार की समीक्षा बैठक में इन तीनों कांग्रेसी नेताओं को बाहर रखे जाने के बाद यह तय हो गया था कि पार्टी ने इनका इस्तीफा ले लिया है। 14 दिसंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली प्रस्तावित रैली तक इन्हें यथास्थिति पर छोड़ा गया है। यही वजह है कि अपनी हनक दिखाने के लिए अल्लावरू, राजेश राम, शकील खां कांग्रेसी नेताओं पर कार्यवाही कर रहे हैं, जो अब अर्थहीन है। प्रदेश अध्यक्ष और प्रभारी की हैसियत प्रदेश के कार्यालय के एक कमरे में सिमट कर रह गई है। देखना है कि आने वाले दिल्ली में प्रस्तावित रैली के बाद कांग्रेस आलाकमान बिहार के मामले में क्या फैसला लेता है। महागठबंधन में गठबंधन की गांठे खुल चुकी है। राजद सहित सभी दलों ने हार के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए पार्टी से किनारा कर लिया है। अब तक जातिगत आधार पर कांग्रेस अपना अध्यक्ष बनाती रही है जिसको राजद और जदयू का नुमाइंदा कहा जाता रहा है।

राजेश राम की संगठन के नाम पर उनकी अनुभवहीनता और अल्लावरू के एनजीओ स्टाइल ने पार्टी रसातल में चला गई। राजेश राम की राजनीतिक योग्यता में उनके पिता दिलकेशर राम और अल्लावरू की राजनीतिक योग्यता में शादी डॉट काम ने बिहार में कांग्रेस का कांग्रेस का कबाड़ा कर दिया। बिहार में नए सिरे से कांग्रेस पार्टी को खड़े करने की कवायद में प्रदेश संगठन के लिए अनुभवी, जुझारू अध्यक्ष की तलाश शुरू हो चुकी है। कांग्रेस के जातिगत समीकरण के नाम पर अध्यक्ष पद की ताजपोशी से पार्टी उबरना चाहती है। संगठन के अनुभवी और निर्विवाद नेता के हाथ में कमान सौंपने से ही कांग्रेस की वापसी संभव है। देखना है कि आलाकमान बिहार में किसे प्रभारी और अध्यक्ष बनाता है।

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