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 महाशिवरात्रि विशेष-अर्धनारीश्वर से सीखें वैवाहिक जीवन में संतुलन और समर्पण


“अर्धनारीश्वरं परमहंसं महादेवमच्युतम् |शिवपार्वतीैकाकारं जगद्धिताय महायशाः ”

डॉ नयन प्रकाश गांधी युवा मैनेजमेंट विश्लेषक ,लाइफ कोच
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महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह जीवन, प्रेम और वैवाहिक संबंधों के मूल्यों को समझने का अवसर भी है। इस अवसर पर शिव और पार्वती का जीवन हमें यह सिखाता है कि सफल वैवाहिक जीवन केवल प्रेम या आकर्षण पर निर्भर नहीं करता, बल्कि समझदारी, धैर्य, सहयोग और संतुलन से बनता है।शिव और पार्वती का अर्धनारीश्वर रूप विशेष रूप से इस संदेश को स्पष्ट करता है। अर्धनारीश्वर में भगवान शिव और माता पार्वती का आधा‑आधा रूप एक साथ प्रदर्शित होता है। यह रूप दर्शाता है कि पुरुष और स्त्री की ऊर्जा का संतुलन जीवन, सृष्टि और संबंधों का आधार है।पुराणों में वर्णित है कि एक बार देवताओं और साधकों ने पूछा कि पुरुष और स्त्री में सर्वोच्च शक्ति कौन है। भगवान शिव ने स्वयं का आधा रूप पार्वती के साथ जोड़ा और दिखाया कि सृष्टि की हर रचना में पुरुष और नारी की ऊर्जा बराबर महत्वपूर्ण है। यह केवल शारीरिक रूप का नहीं, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन का प्रतीक है। जैसे शिव की शक्ति और पार्वती की संवेदनशीलता एक‑दूसरे को पूरा करती हैं, वैसे ही वैवाहिक जीवन में दोनों पक्षों का संतुलन और सम्मान जरूरी है।आज के समय में, वैवाहिक जीवन अक्सर तनाव, असंतुलन और असहमति के कारण प्रभावित होता है। अर्धनारीश्वर की दृष्टि हमें यह समझने में मदद करती है कि स्थायी और खुशहाल संबंध केवल बाहरी प्रयासों से नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन, सहनशीलता और समझदारी से बनते हैं।महाशिवरात्रि का यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि शिव और पार्वती का एकाकार रूप वैवाहिक जीवन में संतुलन, समझदारी और समर्पण का आदर्श है। उनकी कार्यशैली और व्यक्तित्व भले ही अलग थे, फिर भी उनका समन्वय, सहयोग और एक-दूसरे के प्रति समर्पण आज के वैवाहिक जोड़ों के लिए सबसे आवश्यक गुण हैं।

*आधुनिक वैवाहिक जीवन में उपयोगिता*
आज के समय में, वैवाहिक जीवन अक्सर असंतुलन, तनाव और असहमति के कारण प्रभावित होता है। अर्धनारीश्वर से हम निम्न जीवन-सूत्र सीख सकते हैं:

☝️समानता और संतुलन – संबंधों में निर्णय, जिम्मेदारियां और भावनाओं का साझा होना जरूरी है।

☝️समर्पण और सहयोग – कठिन समय में एक-दूसरे का समर्थन करना रिश्तों की मजबूती का आधार है।

☝️सहनशीलता और समझदारी – प्रत्येक साथी की मानसिक और भावनात्मक आवश्यकताओं को समझना और संतुलित दृष्टिकोण अपनाना।

☝️अर्धनारीश्वर दृष्टिकोण – पुरुष और स्त्री ऊर्जा का सम्मान और एक-दूसरे की भूमिका को महत्व देना।

आइए संकल्पबद्ध हो इस महाशिवरात्रि पर, अर्धनारीश्वर के जीवन और व्यक्तित्व से प्रेरणा लेकर हम अपने वैवाहिक संबंधों को मजबूत, स्थायी और सुखद बनाये।

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