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बिहार में हार के बाद कांग्रेस में घमासान, महिला कांग्रेस अध्यक्ष सरवत फातमा का इस्तीफा

’कारण बताओ नोटिस’ का विरोध कर रहे कांग्रेसियों को बड़े नेताओं का समर्थन, पप्पू को लौटाया

-रितेश सिन्हा।

बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की शर्मनाक हार के बाद मचे घमासान में आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, प्रभारी कृष्णा अल्लावारू, पूर्व विधायक दल के नेता डाॅ शकील अहमद खां, कांग्रेस में खामखां बने निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और स्क्रीनिंग कमिटी के चेयरमैन अजय माकन के खिलाफ प्रदेश के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने आर-पार का मोर्चा खोल दिया है। आपको बता दें कि इन सब पर पैसे लेकर पार्टी का टिकट बेचने का संगीन आरोप है। इसके जवाब में पार्टी ने भाजपा से कारोबारी दोस्ती निभाने वाले कपिलदेव यादव को रातोंरात अनुशासन समिति का अध्यक्ष बनाते हुए 43 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता तारिक अनवर अपनी नई भूमिका तलाशने की जुगाड़ में मौका मिलते ही सधे ढंग से निशाना साधने में चूक नहीं करते। इसी क्रम में उन्होंने फिर से कांग्रेस आलाकमान को अपनी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए निशाने पर लिया है।

प्रदेश कांग्रेस के मुख्यालय सदाकत आश्रम में धरने पर बैठे कांग्रेसियों की पीड़ा को तारिक ने अपने पोस्ट के जरिए साझा किया- ’’चुनाव में हुई शर्मनाक हार के बाद प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व को अविलंब समीक्षा बैठक बुलानी चाहिए थी। साथ ही, जिन लोगों की इस हार में प्रत्यक्ष या परोक्ष भूमिका रही है, उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए स्वयं अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। धरना देने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?’’ खरगे के अध्यक्ष बनने के बाद तारिक सीडब्लूसी में जगह बनाने में कामयाब रहे लेकिन एआईसीसी का कमरा छीनने का मलाल उन्हें आज तक है। कांग्रेस में अपनी वापसी के बाद अखिलेश सिंह को बिहार और झारखंड में राजेश ठाकुर, दोनों भूमिहारों को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दिलाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाया था, साथ ही अपने चिरविरोधी पूर्व मंत्री श्याम सुंदर सिंह धीरज को निबटाने में कामयाब रहे। अपनी बेजोड़ संगठन क्षमता के लिए पहचाने जाने वाले धीरज लगातार प्रदेश के महासचिव, एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस के 17 सालों तक अध्यक्ष भी रहे।

अब हार के बाद कार्यकर्ताओं का एक समूह सामूहिक नेतृत्व के रूप में उभर कर आया है। इसकी अगुवाई करने वाले किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय संयोजक राजकुमार शर्मा, अतिपिछड़ा सेल के अध्यक्ष कुंदन गुप्ता, पूर्व विधायक छत्रपति यादव, प्रदेश प्रवक्ता आनंद माधव, रामचंद्र पासवान हैं। वहीं चंपारण के मधुरेंद्र सिंह ने बकायदा राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह, संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल समेत दर्जनों लोगों पर एफआईआर दर्ज करायी है। इस एफआईआर का परिवाद संख्या 2798/2025 है। इसकी प्रति हमारे पास है। इन सब विरोधाभास के बीच इन सभी कांग्रेसी ने जिनको कारण बताओ नोटिस मिला है, सदाकत आश्रम को घेर लिया। इनको मनाने के लिए पप्पू यादव को आगे किया गया। पप्पू अपनी हनक खो चुके हैं। उनका भौकाल गैंगस्टर लाॅरेंस विश्नोई ने एक धमकी में निबटा दिया। एक जमाने में पिस्टल नचाने वाले ये बाहुबली नेता धरने पर बैठे नेताओं के सामने सदाकत आश्रम में जमीन पर बैठ गए और लेट-लेटकर कार्यकर्ताओं से माफी-तलाफी करते दिखाई दिए।

आपको बता दें कि प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम अपने वायरल आडियो टेप में पप्पू यादव पर पेैसे के लेनदेन का आरोप लगा रहे थे, जिस पर आलाकमान अब तक खामोश है। इन पर कार्यवाही और जवाबतलबी होनी चाहिए थी, मगर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और के‐ राजू की सरपरस्ती इन्हें हासिल है, इन्हें कुछ नहीं होगा। इनके खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों को कार्यवाही की पहली किश्त में कारण बताओ नोटिस जारी हो चुका है। आपको बता दें कि इन कार्यकर्ताओं की सच्ची बातों से प्रदेश के बड़े नेताओं के साथ बिहार के प्रभारी बन कर गए अशोक गहलोत भी सहमत थे और किसी ने इनके खिलाफ कार्यवाही करने से इंकार कर दिया था। चुनाव नतीजों के बाद गहलोत ने इन नेताओं के साथ राहुल गांधी से मुलाकात तय कराने का वायदा किया था, मगर आनन-फानन में दिए गए कारण बताओ नोटिस में आग में घी डालने का काम किया। इसमें कांग्रेस में भाजपा के स्लीपर सेल के नाम से पहचाने जाने वाले कपिलदेव यादव को आगे किया गया।

कपिलदेव कुम्हरार से बने विधायक बने और अब मंत्री नितिन नवीन के कारोबारी साझेदार भी हैं और कांग्रेस की मुखबिरी भी करते रहे हैं। इनकी मुखबिरी पर सदाकत आश्रम में घूसकर बिहार सरकार के काबीना मंत्री ने कथित रूप से कांग्रेसियों को पिटा था। कपिलदेव ने खुद सोशल मीडिया पर नितिन नवीन को बधाई देते हुए अपनी फोटो चलवायी थी। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने कांग्रेस की मिट्टीपलित कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। पार्टी की करारी हार की नैतिक जिम्मेदारी लेने की बजाए कार्यकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी करवाया और पप्पू यादव को आश्रम में भेजकर उन्हें डराने की कोशिश की। कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने उनकी बात सुनने के बजाय ’पप्पू यादव वापस जाओ’ के नारे लगाकर उनका विरोध किया।

रही-सही कसर प्रदेश कांग्रेस की महिला अध्यक्ष डाॅ शरबत जहां फातिमा ने अपने पद से इस्तीफा देते हुए माहौल को गर्म कर दिया। उन्होंने अपने इस्तीफा देने के साथ-साथ पार्टी नेतृत्व और बिहार कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए। एक्स हैंडल पर भी एक पोस्ट के जरिए उन्होंने इसकी जानकारी साझा की। उन्होंने पार्टी के टिकट वितरण में जानबूझकर नाइंसाफी के साथ महिलाओं की भागीदारी को नजरअंदाज करने का संगीन आरोप लगाया। धरने पर बैठे असंतुष्ट समूह के नेताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठे नेतृत्व ने राहुल गांधी को प्रदेश नेतृत्व ने गलत जानकारी दी और उनको गुमराह किया। बिहार में कांग्रेस की हार से उपजा असंतोष प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष को हटाए बिना आसानी से शांत नहीं होगा, ऐसा आभास होता है।

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