राष्ट्रकवि दिनकर काव्यकुसुम श्रृंखला में आज की पंक्तियाँ ‘कुरुक्षेत्र’ से!

शांति खोलकर खड्ग क्रांति का जब वर्जन करती है, तभी जान लो किसी समर का वह सर्जन करती है। राष्ट्रकवि दिनकर काव्यकुसुम श्रृंखला में आज की पंक्तियाँ ‘कुरुक्षेत्र’ से!
विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित होगी विशेष कार्यक्रम-“राष्ट्रकवि दिनकर – कुछ यादें और कुछ कविताएँ “

विश्व हिन्दी परिषद् के द्वारा रविवार 31 मई 2020 को शाम 5 वजे आयोजित अगले काव्योत्सव कार्यक्रम “राष्ट्रकवि दिनकर – कुछ यादें और कुछ कविताएँ ” में हमें प्रसन्नता है कि हम सुनेंगे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी के पौत्र अरविन्द कुमार सिंह “दिनकर ” को ।अरविन्द जी प्रारंभ से ही साहित्यानुरागी तथा दिनकर वांग्मय […]