काव्य कुसुम ऋंखला में आज शायर शिवकुमार बिलगरामी के मुक्तक

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अपनों से न गैरों से कोई भी गिला रखना
आंखों को खुला रखना होंठों को सिला रखना
मासूम बहुत हो तुम दुनिया की निगाहों में
तकलीफ़ उठाकर भी चेहरे को खिला रखना

 

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