कन्या राशिवाले दिल से अधिक काम लेते हैं। ये जज़बाती होते हैं। kanकन्यालेकिन, ये सतयुग तो है नहीं, कलियुग है। नतीजा यह होता है कि उम्मीदें पूरी होती नहीं है और कन्या राशिवाले टूट जाते हैं, बिखर जाते हैं। महिलाओं के साथ दिक्कत यह है कि वो अधिक भावुक होती है और पुरुष समाज स्वार्थी। मैं आपलोगों की मांग पर इसे विस्तार से लिखूँगा और अन्य राशियों के बारे में भी लिखूँगा। संसार की हर महिला को यह समझना चाहिये कि लगभग नब्बे प्रतिशत पुरुषों के अंदर महिलाओं के लिये केवल आकर्षण होता है, भावनायें नहीं, जबकि महिलाओं को गलतफहमी हो जाती हैं कि यह पुरुष शायद उसी के लिये इस पृथ्वी पर आया है, पर जब सच्चाई सामने आती है और धीरे धीरे प्रेमी ,पति या आगे चलकर कुछ मामलों में पुत्र का असली चेहरा सामने आने लगता है तो महिलायें इतनी टूट जाती हैं, इतनी बिखर जाती हैं कि उनमें आत्महत्या करने का विचार भी आ जाता है और कभी कभी हिंसक भावनायें भी आने लगती हैं।इन सबसे बचना है आपको। कैसे? कल लिखूँगा।
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