अनंत सागर-अंतर्मुखी मुनि श्री पूज्य सागर जी महाराज द्वारा अंतर्मुखी के दिल की बात(दसवां भाग)

“मानवीयता की उपेक्षा- प्रलय को निमंत्रण’ एक इंसान इतनी बर्बरता का काम कैसे कर सकता है ??? क्या उसके अंदर से मानवीयता, करूणा, ममता चली गई है। मानवता स्वार्थ के प्रति इतनी समर्पित हो चुकी है कि अन्य जीवों का जीवन नगण्य बन चुका है !! जानवरों की प्रकृति के संरक्षण में कितनी अहम भूमिका […]