राष्ट्रकवि दिनकर की स्मृति में

स्व रामधारी सिंह दिनकर सदियों से प्रसुप्त भारतीय आत्मा की हुंकार के रूप में उदित हुए थे ।उन्होंने भारतीय अस्मिता के हर पहलू को व्यंकृत किया ।कुरुक्षेत्र के माध्यम से युधिष्ठिर की क्षमा और अहिंसक वृत्ति को फटकार लगायी – क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो उसको क्या जो दंतहीन ,विषहीन ,विनीत […]