कोरोना महामारी को लेकर बहुत सारे अंधविश्वास जो समाज में फैल रहे हैं या फैलाये जा रहे हैं, वो कोरे बकवास हैं। जैसे, ग्रामीण क्षेत्रों में अब कोरोना को ‘कोरोना माई’ कहकर पूजे जाने का समाचार भी आ रहा है। इसके लिये शांति पाठ किये जाने का समाचार भी मिल रहा है। ये सब फालतू की चीजे हैं। कोरोना से बचना है तो जो वैज्ञानिक और धरातल पर के उपाय हैं, वही कीजिये। हाँ, एक स्थान पर मैं आपकी मदद कर सकता हूँ। हमारे मस्तिष्क में ही वो ऊर्जा उपस्थित है, जो आपकी प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यूनिटी पाँवर बढ़ा सकती है। इसका सीधा संबंध मस्तिष्क के उन तंत्रिकाओं को विकसित करने से है, जो रोगों से लड़ने और जीतने की ताकत आपको देता है। यदि कोई व्यक्ति बहुत बीमार हो और यहाँ तक कि उसे शक हो कि उसे कोरोना हो सकता है या कोई गंभीर बीमारी हो सकती है तो मुझसे संपर्क कर सकता है। बिल्कुल वैज्ञानिक तरीके से उसकी सहायता की जा सकती हैं। ऐसे मामले मेरे सामने आये हैं और मैं सहायता भी करना चाहता हूँ, पर दूरियाँ बहुत होने के कारण मैं सहायता नहीं कर पाता हूँ। कोई शिविर लगाकर जनकल्याण का यह काम करना चाहता हो तो मेरी पूरी सहायता लोगों को प्रत्यक्ष रुप से मिलेगी।

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