आईये, 6 जून 2020, आज शनिवार 5 बजे जुड़ते है – वरिष्ठ गीतकार एवं शायद शिवकुमार बिलग्रामी जी से

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न तो अक्स हूं न वुजूद हूं मैं तो जश्न हूं किसी रूह का
मुझे आईनों में न देख तू मुझे ख़ुश्बुओं में तलाश कर

यूं तो शिवकुमार बिलगरामी साहब का यह शे’र ही उनका परिचय है , लेकिन अपने पाठकों को बताते चलें कि विश्व हिन्दी परिषद के फेसबुक पेज पर अपनी बेटी आख्या सिंह के साथ आज शाम 5 बजे अपनी लाइव प्रस्तुति देने वाले गीतकार और शायर श्री शिवकुमार बिलगरामी बहु प्रतिभा संपन्न रचनाकार हैं । यद्यपि वह लखनऊ विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में परास्नातक हैं , लेकिन यह बहुत कम लोगों को पता होगा कि वह संस्कृत , हिन्दी , उर्दू और पंजाबी भाषा में लेखन करते हैं । विभिन्न भाषाओं के ज्ञाता होने के साथ साथ छन्दशास्त्र पर उनकी ज़बरदस्त पकड़ है जिसके कारण उनकी रचनाओं में एक अलग ही सौंदर्य देखने को मिलता है । छन्दविधान और भाषा पर अपनी अनूठी पकड़ के कारण वह आज के दौर के सभी कवियों से अलग नज़र आते हैं और यही कारण है कि उनकी रचनाएं बहुत अधिक लोकप्रिय हो रही हैं और देश विदेश के कई प्रतिष्ठित गायक उनके गीत ग़ज़लों को अपनी आवाज़ में विभिन्न माध्यमों से जन जन तक पहुंचा रहे हैं । इन्हें यूट्यूब पर भी सुना जा सकता है । विश्व हिन्दी परिषद के पिछले लाइव प्रोग्राम में उनके द्वारा संस्कृत , हिन्दी और उर्दू में लिखित रचनाओं का काव्य पाठ और गायन हुआ था । इस बार विश्व हिन्दी परिषद के दर्शकों के लिए वह बहुत कुछ नया लेकर आ रहे हैं । गीत , ग़ज़ल और भजन के साथ साथ सूफ़ी अंदाज़ वाले उनके नग़में आप को कविता का एक नया आयाम ही महसूस करायेंगे । कार्यक्रम में उनका साथ दे रही उनकी सुपुत्री सुश्री आख्या सिंह एक बेहतरीन स्वर साधिका के साथ साथ एक अच्छी कम्पोज़र भी हैं । सभी पाठकों से अनुरोध है कि वे विश्व हिन्दी परिषद के पेज से अवश्य जुड़े और आज के इस अनूठे काव्य आयोजन में शामिल हों ।

आईये, 6 जून 2020, शनिवार 5 बजे जुड़ते है – वरिष्ठ गीतकार एवं शायद शिवकुमार बिलग्रामी जी एवं शास्त्रीय सुगम संगीत साधिका सुश्री आख्या सिंह विश्व हिंदी परिषद के फेसबुक पेज https://www.facebook.com/vishwahindiparishad पर!

विश्व हिंदी परिषद द्वारा आयोजित ‘काव्योत्सव ‘ में आपका हार्दिक स्वागत है।

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