सिंदुआरी और गोपालगंज हत्याकांड -राजनैतिक

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सिंदुआरी और गोपालगंज हत्याकांड में जातीय चश्मा
बिहार में जातीयता की गाँठ अबतक खुली नहीं है जो बिहार के विकास में बाधक है. हत्याओं को भी जातीय चश्मे से देखा जाता है. सिंदुआरी और गोपालगंज की घटनाएँ एक जैसी ही है , लेकिन देखने का नजरिया अलग-अलग है.
नीतीश कुमार बिहार में राक्षसी प्रवृतियों के आज सबसे बड़े संरक्षक हैं. आलोचकों और विपक्ष को चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है. नीतीश राज में मुझपर 13 केस हुए. मेरी सिक्योरटी हटा दी गयी.
बिहार में पूरी व्यवस्था चरमरा गयी है. अराजकता का माहौल है, मोकामा में तीन साल की बच्ची के साथ अमानवीय कृत्य होता है और देखने के लिए जाने वाला तक कोई नहीं है.
न मैं नीतीश के साथ हूँ और न तेजस्वी के साथ हूँ. हमारी लड़ाई सिद्धांतों को लेकर है. हम अराजकता के खिलाफ लड़ते रहेंगे. यह रास्ता हमने खुद चुना है. हम जॉर्ज फर्नाडिज को मानने वाले लोग हैं, सत्ता के लिए नहीं हम सिद्धांतों की लड़ाई लड़ते हैं.

 

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