टीबी मरीजों से नहीं करें भेदभाव, यह छुआछूत की बीमारी नहीं

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-अगर किसी में लक्षण दिखे तो अस्पताल ले जाकर उसका इलाज करवाएं
-जिला यक्ष्मा केंद्र में टीबी एंड केयर सपोर्ट ग्रुप की बैठक हुई आयोजित

भागलपुर, 28 जुलाई-
 
टीबी एक संक्रामक बीमारी जरूर है, लेकिन यह छुआछूत  से नहीं फैलती। इसलिए अगर समाज के किसी भी व्यक्ति में टीबी के लक्षण दिखे तो उसे तत्काल सरकारी अस्पताल ले जाएं। वहां पर अगर जांच में टीबी होने की पुष्टि होती है तो उसका मुफ्त में इलाज किया जाएगा। साथ ही उसे दवा भी मुफ्त में मिलेगी और जब तक इलाज चलेगा, तब तक उसे पांच सौ रुपये प्रतिमाह पौष्टिक आहार के लिए सहायता राशि भी मिलेगी।
यह बातें गुरुवार को जिला यक्ष्मा केंद्र में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक में कही गई। बैठक का आयोजन कर्नाटका हेल्थ प्रमोशन ट्रस्ट (केएचपीटी) ने स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से किया। बैठक में 9 मरीज, 9 देखभाल करने वाले एक टीबी चैंपियन, एक सामाजिक संरचना के साथ-साथ सीडीओ, डीपीसी, एसटीएस, सीसी इत्यादि मौजूद थे। बैठक में सबसे पहले मरीजों की परेशानियों को सुना गया और उसका निवारण जिला यक्ष्मा पदाधिकारी और केएचपीटी के सुमित कुमार द्वारा किया गया। इसके बाद मरीजों को खान-पान के बारे में बताया गया। उन्हें पौष्टिक भोजन की सलाह दी गई। साथ में दवा का कोर्स पूरी करने की सलाह दी गई। साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखने के लिए कहा गया। टीबी मरीजों को समाज में टीबी के लक्षण वाले लोगों को जांच कराने की सलाह देने या फिर जिला यक्ष्मा केंद्र से संपर्क करने की सलाह देने के लिए कहा गया। इसके बाद डीपीसी अभिषेक कुमार ने बैठक में बताया कि समाज में टीबी को कलंक के रूप में माना जाता है। इस कलंक को कैसे मिटाया जाए, इसकी जानकारी उन्होंने दी। साथ ही जिस मरीज की दवा का कोर्स पूरा हो गया, उसकी आपबीती सुनी गई।
2025 तक जिला बनेगा टीबी मुक्तः जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. दीनानाथ ने बताया कि 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त बनाना है। इसे लेकर लगातार प्रयास हो रहे हैं। इसी सिलसिले में टीबी केयर एंड सपोर्ट ग्रुप की बैठक आयोजित की गई। बैठक के जरिये टीबी मरीजों को दवा का कोर्स पूरा करने की सलाह दी गई। साथ ही उन्हें यह बताया गया कि टीबी के इलाज के लिए सरकार की तरफ से जो सुविधाएं मिल रही हैं, इसके बारे में आप भी लोगों को बताइए, ताकि समाज के अधिक से अधिक लोग सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें । विभाग की ओऱ से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। यदि समाज के लोग भी इसमें भागीदार बनेंगे तो टीबी को जड़ से समाप्त करने में मदद मिलेगी।

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